वंदना

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माँ सरस्वती वंदना

saraswatee1

हे, ज्ञान की ज्योति, जगाने वाली…….
हे, अमृत रस,
वर्षाने वाली………
तेरी, महिमा
अपरम्पार,
तुझको, पूज रहा संसार
………

हे, ज्ञान की ज्योति, जगाने वाली…….

जो जन तेरी, शरण में आते,
बल बुद्धि विद्या, ज्ञान हैं पाते ……….
हे मोक्षदायिनी, देवी माता ……
कर दो बेड़ा पार ………..
तुझको पूज रहा संसार ………

हे, ज्ञान की ज्योति, जगाने वाली…….

हम पर कृपा बनाये रखना ,
ज्ञान से मन हर्षाये रखना …..
हे वीणाधारिणी हंसवाहिनी …….
हर लो, जग का सब अंधकार …….
तुझको पूज रहा संसार ….

हे, ज्ञान की ज्योति, जगाने वाली…….
हे, अमृत रस,
वर्षाने वाली………
तेरी, महिमा
अपरम्पार,
तुझको, पूज रहा संसार
………

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“जय-जय राम”
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मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम,
तेरे चरणों में हैं बसते जग के सारे धाम..............
जय-जय राम सीताराम,  जय-जय राम सीताराम.........२

अयोध्या नगरी में तुम जन्मे , दशरथ पुत्र कहाये,
विश्वामित्र थे गुरु तुम्हारे, कौशल्या के जाये,
ऋषि मुनियों की रक्षा करके तुमने किया है नाम ..........२
तुलसी जैसे भक्त तुम्हारे, बांटें जग में ज्ञान................
जय-जय राम सीताराम,  जय-जय राम सीताराम.........२

मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम..................

सुग्रीव-विभीषण मित्र तुम्हारे, केवट- शबरी साधक,
भ्राता लक्ष्मण संग तुम्हारे, राक्षस सारे बाधक,
बालि-रावण  को संहारा, सौंपा अदभुद  धाम...........२
जटायु सा भक्त आपका आया रण में  काम .................
जय-जय राम सीताराम,  जय-जय राम सीताराम.........२

मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम..................  

शिव जी ठहरे तेरे साधक,  हनुमत भक्त कहाते,
जिन पर कृपा तुम्हारी होती वो तेरे हो जाते,
सबको अपनी शरण में ले लो, दे दो अपना धाम  ........२
जग में हम सब चाहें तुझसे, भक्ति का वरदान .................
जय-जय राम सीताराम,  जय-जय राम सीताराम.........२

मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम..................  

मोक्ष-वोक्ष कुछ मैं ना माँगूं , कर्मयोग तुम देना,
जब भी जग में मैं गिर जाऊँ मुझको अपना लेना,
कृष्ण और साईं रूप तुम्हारे, करते जग कल्याण ................२
कैसे करुँ वंदना तेरी , दे दो मुझको ज्ञान .....................
जय-जय राम सीताराम,  जय-जय राम सीताराम.........२

मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम.................. 

जो भी चलता राह तुम्हारी, जग उसका हो जाता,
लव-कुश जैसे पुत्र वो पाए, भरत से मिलते भ्राता,
उसके दिल में तुम बस जाना जो ले-ले तेरा नाम .........२
भक्ति सहित अम्बरीष सौंपे तुझको अपना प्रणाम ..........
जय-जय राम सीताराम,  जय-जय राम सीताराम.........२
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम..................     

मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम..................
तेरे चरणों में हैं बसते जग के सारे धाम..............
जय-जय राम सीताराम,  जय-जय राम सीताराम.........२

रचयिता ,
अम्बरीष श्रीवास्तववास्तुशिल्प अभियंता
91,
सिविल लाइंस सीतापुर , उत्तर प्रदेश , इंडिया ( भारतवर्ष ),

ईमेल: kaviambarish@gmail.com

, मोबाइल : +919415047020

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प्रभु परशुराम की महिमा”

parashuram

भारत वर्ष की धरती पर, प्रभु ने षष्ठम् अवतार लिया |
भक्तों की रक्षा करने को, भगवान ने फरसा थाम लिया ||

त्रेता युग में थे तुम जन्मे, भृगु के पौत्र कहाये थे |
जमदग्नि-रेणुका के तुम जाये, ऋषि-कुल में तुम आये थे ||

प्रसेनजित के पुण्य थे पाए, साक्षात् शिव से फरसा पाया,
कामधेनु का दुग्ध पिया था, माँ के आँचल की थी छाया |

कामधेनु का दर्शन करके, हैहयनरेश था ललचाया |
ऋषि के ना करने पर उसने, कामधेनु का हरण कराया ||

पुरुषोत्तम लौटे जब आश्रम, कृतवीर्य को था ललकारा |
सहस्त्र भुजाएं काट के उसकी सैन्य सहित उसको संहारा ||

अनुपस्थिति में परशुराम की, अर्जुनपुत्र था आश्रम आया |
एकांत में उसने ऋषि को पाकर, जमदग्नि का वध करवाया ||

प्रतिशोध में अपने पिता के, हैहय क्षत्रिय सब संहारे |
पापमुक्त कर दिया धरा को, सहस्त्रबाहु गया प्रभु के द्वारे ||

सर्वोपरि है पिता की आज्ञा, युद्धनीति विधि ज्ञाता हैं |
प्रभु-भक्त ब्राह्मण समाज के, ये तो भाग्य विधाता हैं ||

शिव-धनुष टंकार सुनी जब, तुरतहिं रक्षा को थे धाये |
सियास्वयंवर में थे पहुंचें, सप्तावतार के दर्शन पाए ||

सीता को आशीष दिया, सुखसौभाग्य सदा तुम पाओ |
श्रीराम संग सदा बिराजो, पतिव्रता तुम सदा कहाओ ||

शिष्य भीष्म और द्रोण तुम्हारे, कर्ण को भी था ज्ञान दिया |
महाभारत काल में तुमने, प्रभु भक्तों को मान दिया ||

ब्राह्मणों की रक्षा में तुमने, सारा जीवन लगा दिया |
आज भी आवश्यकता है तुम्हारी , सबने तुमको याद किया ||

कल्कि पुराण में कहा गया है, प्रभु दशमावतार में आयेंगे |
तुम्हीं गुरु होगे उन प्रभु के, तुम्हीं से शिक्षा पाएंगे ||

भगवन परशुराम की महिमा, जगत में जो भी गायेगा |
सरस्वती की कृपा रहेगी, सदा मान वो पायेगा ||

रचयिता ,
अम्बरीष श्रीवास्तववास्तुशिल्प अभियंता
91,
सिविल लाइंस सीतापुर , उत्तर प्रदेश , इंडिया ( भारतवर्ष ),

ईमेल: kaviambarish@gmail.com

, मोबाइल : +919415047020

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