अविस्मरणीय बचपन

“बचपन के दिन”

bachpan

टिमटिम तारे, चंदा मामा,

माँ की थपकी मीठी लोरी|

सोंधी मिटटी, चिडियों की बोली,

लगती प्यारी माँ से चोरी ||


सुबह की
ओस सावन के झूले,

खिलती धूप में तितली पकड़ना|

माँ की घुड़की पिता का प्यार,

रोते रोते हँसने लगना ||


पल में रूठे, पल में हँसते ,

अपने आप से बातें करना |

खेल खिलौने साथी संगी ,

इन सबसे पल भर में झगड़ना ||


लगता है वो प्यारा बचपन ,

शायद लौट के ना आए |

जहाँ उसे छोड़ा था हमने ,

वहीं पे हमको मिल जाए ||

रचयिता ,

अम्बरीष श्रीवास्तववास्तुशिल्प अभियंता
91,
सिविल लाइंस सीतापुर , उत्तर प्रदेश , इंडिया ( भारतवर्ष ),

ईमेल: kaviambarish@gmail.com

, मोबाइल : +919415047020

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

Liked it here?
Why not try sites on the blogroll...

%d bloggers like this: