कविता

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“कविता”

ma-saraswatee

अभावों में बीता हो शैशव,

बचपन भी हो द्वंद भरा |

युवावस्था संघर्ष भरी हो ,

कविता उपजे उसी धरा ||


व्यंग्य ओज अलंकार हैं इसके,

अंतर्मन को छू जाती |

इतनी शक्ति पाई इसने ,

जड़ तक को चेतन कर जाती ||


करुणा ममता दया दृष्टी से,

हर प्राणी को अपनाए,

क्रूर ह्रदय हो चाहे कितना,

उसको राह पे ले आए |


भीगी पलकें भीगा दामन,

सुलगती सांसे दहकती छाती |

विरह अग्नि होठों पे आह ,

कविता वहाँ जनम है पाती ||


कवि की रचना तथ्यपरक हो,

फूंके वो जनजन में प्राण |

संयमित होकर कलम उठाये,

उद्देश्य हो उसका जगकल्याण||

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माँ”

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अपने रक्त से सिंचित करके माँ नें हमको जनम दिया ,

गर्भावस्था से ही उसने संस्कारों का आधार दिया |

सर्वप्रथम जब आँख खुली तो मुख पे माँ ही स्वर आया ,

दुनिया में किस बात का डर जब सिर पर हो माँ का साया||

पहला स्वर सुनते ही उसने छाती से अमृत डाला,

अपने वक्षस्थल में रखकर ममता से उसने पाला |

प्रथम गुरु है माँ ही अपनी उससे पहला ज्ञान मिला,

माँ का रूप है सबसे प्यारा सबसे उसको मान मिला ||

नारी के तो रूप अनेकों भगिनी रूप में वो भाती ,

संगिनी रूप में साथ निभाकर मातृत्व से सम्पूर्णता पाती |

अपरम्पार है माँ की महिमा त्याग की मूरत वो कहलाती ,

उसके कर्म से प्रेरित होकर मातृ-भूमि पूजी जाती ||

माँ में ही नवदुर्गा बसती माता ही है कल्याणी ,

माँ ही अपनी मुक्तिदायिनी माँ का नाम जपें सब प्राणी |

माँ के चरणों में स्वर्ग है बसता करते सब तेरा वंदन,

तेरा कर्जा कभी न उतरे तुझको कोटिश अभिनन्दन ||

रचयिता ,

अम्बरीष श्रीवास्तववास्तुशिल्प अभियंता
91,
सिविल लाइंस सीतापुर , उत्तर प्रदेश , इंडिया ( भारतवर्ष ),

ईमेल: kaviambarish@gmail.com

, मोबाइल : +919415047020

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माँ की महिमा

नैनन में है जल भरा,  आँचल  में  आशीष |
तुम सा दूजा नहि यहाँ , तुम्हें नवायें शीश ||

कंटक सा संसार है, कहीं   न  टिकता  पांव |
अपनापन मिलता नहीं , माँ के सिवा न ठांव ||

रहीं लहू से सींचतीं , काया तेरी देन |
संस्कार सारे दिए, अदभुद तेरा प्रेम  ||

रातों को भी जागकर,   हमें  लिया है पाल |
ऋण तेरा  कैसे  चुके,    सोंचे    तेरे  लाल ||

स्वारथ  है  कोई  नहीं ,  ना    कोई     व्यापार |
माँ  का अनुपम प्रेम   है,. शीतल सुखद  बयार ||

जननी को जो पूजता , जग पूजै है सोय |
महिमा वर्णन कर सके, जग में दिखै न कोय ||

माँ तो जग का मूल है, माँ  में बसता प्यार |
मातृ-दिवस पर पूजता, तुझको  सब संसार ||

रचयिता:
अम्बरीष श्रीवास्तव ” वास्तुशिल्प अभियंता”
९१, आगा  कालोनी, सिविल लाइंस सीतापुर २६१००१ (उत्तर प्रदेश )
भारतवर्ष
फ़ोन : +९१ ५८६२ २४४४४०
मोबाइल +९१ ९४१५०४७०२०

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